हम बायोमास को-फायरिंग समाधान उपलब्ध करवा रहे हैं।
नए इयू विनियमों के अंतर्गत राष्ट्रों को 2020 तक कार्बन उत्सर्जन में 20 प्रतिशत की कमी लानी है, साथ ही नवीकरणीय और सतत ऊर्जा स्रोतों से उत्पादित की जा रही ऊर्जा के अगले 20 प्रतिशत से सरकार द्बारा उन तरीकों में गंभीर परिवर्तन लाने के लिए दबाव बन रहा है, जिनसे ऊर्जा उत्पादित की जा रही है।
जब सतत तथा नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत अधिक मह्त्वपूर्ण हो जायेंगे और आने वाले दशकों में उनकी मांग बहुत अधिक बढ़ जाएगी, यह ऊर्जा स्रोत भी हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर सकते हैं।
जीवाश्म ईंधन ऊर्जा मिश्रण का एकीकृत अंग रहेगा और चूंकि वैश्विक ऊर्जा का परिदृश्य बदल रहा है इसलिए पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने वाली प्रौद्योगिकी पर्यावरणीय लक्ष्यों को पूरा करने में प्रमुख भूमिका निभाएगी।
इसलिए जीवाश्म ईंधन के प्रयोग से पर्यावरणीय पर होनेवाले प्रभाव को कम करने के लिए अपेक्षित ऊर्जा उत्पादित करना हम कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं?
पिछले दशक के दौरान, जिसमें कोयला और बायोमास दोनों के मिश्रण को जलाकर ऊर्जा उत्पन्न किए जाने वाले को-फायरिंग (उत्पादित ऊर्जा में कमी किए बिना कार्बन उत्सर्जन कम करना) में भारी वृद्धि देखी गई है। यह प्रौद्योगिकी मौजूदा भंडार सुरक्षित करते हुए और ऊर्जा आपूर्ति की गारंटी सहित जीवाश्म ईंधन के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण है।
यूके इन परिवर्तनों के लिए प्रतिबद्ध है और सरकार ने हाल ही में बायोमास विकास तथा संस्थापन की लागत में £12 मिलियन की सहायता देने का वचन दिया है। इसके साथ ही, ऊर्जा और मौसम परिवर्तन विभाग (डीइसीसी) ने पहले ही बायोमास ऊर्जा स्टेशन स्थापित करने के लिए £55 मिलियन आबंटित किया है और यूके की योजना है कि अपनी ऊर्जा का 15 प्रतिशत 2020 तक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से प्राप्त किया जाए।
इस वर्ष के आरंभ में अनुसंधान एवं विकास के पश्चात यूके के सबसे बडे एवं सबसे स्वच्छ कोल-फायर पावर स्टेशन ड्राक्स ने नवीकरणीय बायोमास सामग्रियों को जलाने के लिए £18 मिलियन की एक परियोजना शुरु की है। ड्राक्स में बायोमास और को-फायरिंग की इस सुविधा के पूरा हो जाने पर यह विश्व में अपने तरह की सबसे बडी सुविधा होगी।
यार्कशायर और हंबर क्षेत्र में स्थित ड्राक्स, जीवाश्म ईंधन के जलने के प्रभाव को कम करने के लिए विकसित प्रौद्योगिकी को कार्यान्वित करने में अग्रणी है। इस क्षेत्र में परियोजनाओं के रोल-आउट में उनकी विशेषज्ञता यूके को विश्वसनीय एवं सुरक्षित विद्युत आपूर्ति प्रदान करने में निम्नतर कार्बन अर्थव्यवस्था के और करीब लाती है।
ड्राक्स द्वारा कार्यान्वित की जा रही को-फायरिंग प्रौद्योगिकी से पावर स्टेशनों के उत्पादन से उत्सर्जन में 17.5 प्रतिशत की कमी होगी और 3 बायोमास पावर स्टेशन भी एक साथ शुरु हो रहा है, जिससे ड्राक्स यूके के कुल नवीकरणीय ऊर्जा का 15 प्रतिशत और राष्ट्र के कुल बिजली का 10 प्रतिशत उत्पादित करेगा।
यार्कशायर और हंबर का पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी सेक्टर स्वच्छ प्रौद्योगिकी के लिए नवीनतम तकनीकी प्रदान करता है। यह क्षेत्र अगली पीढ़ी का जैवईंधन उत्पादित करने के लिए बीपी द्वारा डयूपोंट और एसोसियटेड ब्रिटिश फूड्स की साझीदारी से निर्मित एक नए £200 मिलियन की सुविधा का दावा करता है। हल में इस साईट से एक वर्ष में 420 लीटर बायोएथनॉल उत्पादित करने की उम्मीद है और इस नई प्रौद्योगिकी के भावी विकास का वाहक बनेगी। यह साईट खाद्य-भंडारों से प्रति वर्ष 20,000 लीटर बायोबुटनॉल ईंधन उत्पादित करने वाले संयत्र के प्रदर्शन की मेजबानी भी करेगा।
यह इलाका इस क्षेत्र में अग्रणी अकादमिक अनुसंधान भी प्रदान करता है। शेफिल्ड विश्वविद्यालय बायोमास तथा अपशिष्ट पदार्थों के तापीय रूपांतरण के लिए विश्व का प्रमुख अनुसंधान केंद्र है और बायोमास/अपशिष्ट पदार्थों के ज्वलनशील, गैसीकरण तथा पायरोलिसिस एवं संबंधित विद्युत ऊर्जा उत्पादन व्यवस्था में नवोन्मेषी अनुसंधान के लिए विश्व में जाना जाता है।
चूँकि बायोमास और को-फायरिंग कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए छोटी से लेकर मध्यम अवधि का समाधान प्रदान करता है तथा कडे़ विनियमों का पालन करता है इसलिए यॉर्कशायर और हंबर क्षेत्र इस उद्योग में नवोन्मेष एवं सफलता दोनों पाने के लिए आदर्श स्थल हैं।
यॉर्कशायर और हंबर में स्थापित होने पर आपकी कंपनी कैसे लाभान्वित होगी, यह जानने के लिए यहाँ क्लिक करें।