हम स्वच्छ जल के अभिनव प्रबंधन के माध्यम से जल की कमी का सामना कर रहे हैं।
वैश्विक मुद्दा
ऐसा अनुमान है कि विश्वभर में लगभग 1.2 बिलियन लोगों को पीने के लिए स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं है जोकि विश्व की जनसंख्या का छठा भाग है।
वर्ष 2050 तक यह संख्या बढ़कर 2 बिलियन हो जाएगी।
जबकि गत दशक के दौरान कार्बन डाईआक्साइड गैस का उत्सर्जन पर्यावरण संबंधी प्रमुख मुद्दा रहा है परंतु विश्व में बहुत से लोगों के लिए स्वच्छ जल, जल तथा सफाई की कमी बेहद प्रमुख मुद्दा रहा है। और ग्लोबल वार्मिंग के प्रति बढ़ती चिंता के साथ-साथ इसमें और भी वृद्वि होगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार विकासशील देशों में 80% रोग तथा मृत्यु गंदे जल अथवा जल की कमी के कारण होती हैं तथा यूएस सरकार का अनुमान है कि आगामी 3-6 वर्षों में कम से कम 36 देशों को जल की कमी का सामना करना होगा और यह मुद्दा मात्र विकासशील देशों से ही नहीं जुड़ा है अपितु सच्चे अर्थों में यह एक वैश्विक मुद्दा है।
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विश्व जल परिषद के अनुसार वर्ष 1900 से अक्षय जल संसाधनों के प्रयोग में छ: गुणा वृद्वि हुई है तथा 2050 तक इसके पुन: दो गुणा हो जाने का अनुमान है अत: अपशिष्ट जल को रिसायकलिंग द्वारा स्वच्छ जल में परिवर्तित करना विश्व, विशेषत: विकासशील एवं तीसरी दुनिया के देशों के लिए महत्वपूर्ण होगा।
अपशिष्ट जल प्रबंधन में प्रमुख वैश्विक कंपनियों में से एक यॉर्कशायर वाटर यूके के यॉर्कशायर तथा हंबर क्षेत्र में स्थापित है। जल प्रबंधन के कारोबार में विश्व की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक यह कंपनी वर्तमान में 62 अपशिष्ट जल शोधन कार्यों का परिचालन करती है जिससे सामूहिक रूप से प्रतिदिन 0.8 बिलियन लीटर अपशिष्ट जल का शोधन होता है।
यॉर्कशायर वाटर ने रिसाव के कारण जल की हानि में कमी करने के लिए एक नायाब तरीके का विकास किया है। प्लेटलेट प्रौद्योगिकी जिसमें पाइपों के नेटवर्क में चुनिंदा स्थानों से रिसाव होनेवाली पाइपों में तीव्रता से सिलिकॉन प्लेटलेट्स को डाला जाता है जोकि पाइप के अंदर से ही रिसाव को बंद कर देती हैं। इस संकल्पना का प्रयोग मूलत: तेल और गैस उद्योग में किया जाता है जिससे आम जनता को कम परेशानी होती है तथा पर्यावरण पर भी इसका कम प्रभाव होता है क्योंकि इस कार्य में सड़कों को खोदने तथा मरम्मत करने की आवश्यकता नहीं होती है। इससे स्वच्छ जल की हानि में भी कमी होती है।
इस प्रौद्योगिकी के बहुत से भावी लाभ हैं तथा वैश्विक तौर पर इनका प्रयोग किया जा सकता है। पाइप फटने की रोज़मर्रा की मरम्मत से लेकर जल के रिसाव के स्तर तथा सड़को में होनवाले छिद्रों में कमी और ग्राहक आपूर्ति करने में कम से कम परेशानी इस प्रौद्योगिकी के प्रमुख लाभ हैं।
पलसॉनिक भी यॉर्कशायर और हंबर में स्थापित है जिसे कि जीवाणुओं (माइक्रो आर्गेनिजम) के प्रयोग के माध्यम से औद्योगिक स्रोतों से उत्पन्न होनेवाले अपशिष्ट जल का शोधन करने में विशेषज्ञता हासिल है। इस प्रकार की प्रौद्योगिकी विशेषत: महत्वपूर्ण है चूँकि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं निमार्ण तथा उद्योग में कही अधिक मात्रा में जल का प्रयोग करती हैं जिस के कारण जल की आपूर्ति पर और अधिक दबाव पड़ता है।
इस क्षेत्र में जल उद्योग की अत्याधुनिक कंपनियाँ विश्व प्रसिद्व ज्ञान केन्द्रों तथा अनुसंधान एवं विकास संसाधनों से नज़दीकी संपर्क के कारण प्राप्त होनेवाले लाभ भी उठा सकती हैं। यूके के 10 शीर्ष विश्वविद्यालयों में से एक लीड्स विश्वविद्यालय ने जल तथा अपशिष्ट जल शोधन में भावी विकास कार्यों के लिए यॉर्कशायर वाटर के साथ रणनीतिक अनुसंधान भागीदारी की है। यह अभिनव प्रयोग जल आधारित आक्सीजन जीवी तथा अनाक्सीय प्रणालियों का विकास करने पर आधारित है जिससे प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाले शैवाल तथा बैक्टीरिया के प्रयोग से जल की सफाई की जाएगी।
यह क्षेत्र कंपनियों को जैव रसायन विधि के प्रयोग से अपशिष्ट जल के शोधन पर कार्य करने वाले शेफील्डस बायोलोजिकल एंड एनवायरमेंटल सिस्टम्स ग्रुप सहित अन्य सर्वोतकृष्ट केन्द्रों तक पहुँच प्रदान करता है।
उभरते पर्यावरणीय प्रौद्योगिकी सेक्टर जोकि वर्तमान में विश्व स्तर पर £400 बिलियन का बाज़ार है तथा जिसमें जल उद्योग का हिस्सा 50% से भी अधिक है, के साथ यॉर्कशयर और हंबर का विशेषज्ञता प्राप्त कंपनियों का नेटवर्क इस सेक्टर में व्यवसाय के लिए इस क्षेत्र को प्रमुख कार्यस्थल का दर्जा प्रदान करता है। ज्ञान, विशेषज्ञता तथा समर्थन कंपनियों को इस बाज़ार पर पकड़ मज़बूत करने में सहायता करता है ताकि विश्व स्तर पर जल की कमी को दूर करने के हर संभव प्रयास किए जा सके।
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